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Monday, December 24, 2007

सरस्वती स्तोत्र (श्लोक)

किसी भी कर्यक्रम की शुरुआत आज भी भारत में देवी सरस्वती को नमन करके किया जाता है। प्रस्तुत है ये श्लोक जो हम बचपन में स्कूल के कार्यक्रमों में गाते थे।

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Thursday, October 11, 2007

राग भूपाली -आगे (बंदिश सिखाने की कोशिश)



इस लेख में जल्द ही राग भूपाली को गा कर सिखाया जायेगा। कुछ तकनीकी वजहों से यहाँ पर पोस्ट की गई आवाज़ को मिटाया गया है। असुविधा के लिये खेद है।

गायक को कुछ बातों पर ध्यान देना चहिये । जैसे कि कुछ रागों के स्वर एक ही होते हैं मगर भिन्न स्वर समुह के प्रयोग से या न्यास के स्वर बदल जाने से, अथवा, राग के चलन से दोनों बिल्कुल एक स्वर वाले राग भी बिल्कुल पृथक होते हैं। अत: गाते बजाते समय इन बातों का खयाल रखना बहुत ज़रूरी है जिस

राग भूपाली जैसा ही राग है- राग देसकार। दोनों में ही 'सा रे ग प ध' स्वरों का प्रयोग होता है, मगर दोंनों रागों का ठाठ अलग है, न्यास के स्वर अलग हैं और एक पूर्वांग तो दूसरा उत्तरांग प्रधान राग है।

भूपाली में ध्यान दें कि सा ध़ सा रे ग का प्रयोग बहुत होता है। ये इसका मुख्य स्वर समुह है, ग का बहुतायत से प्रयोग होता है।

http://www.sawf.org/audio/bhoop/fhk_bhoop.ram

http://www.sawf.org/audio/bhoop/bgak_bhoop.ram

http://www.sawf.org/newedit/edit08052002/musicarts.asp

मैं इन सभी वेब साइट को प्रकाशित करने वालों की भूरि भूरि प्रशंसा करती हूँ और धन्यवाद ज्ञापन भी ।