Wednesday, November 12, 2014
Monday, December 24, 2007
सरस्वती स्तोत्र (श्लोक)
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Thursday, October 11, 2007
राग भूपाली -आगे (बंदिश सिखाने की कोशिश)
इस लेख में जल्द ही राग भूपाली को गा कर सिखाया जायेगा। कुछ तकनीकी वजहों से यहाँ पर पोस्ट की गई आवाज़ को मिटाया गया है। असुविधा के लिये खेद है।
गायक को कुछ बातों पर ध्यान देना चहिये । जैसे कि कुछ रागों के स्वर एक ही होते हैं मगर भिन्न स्वर समुह के प्रयोग से या न्यास के स्वर बदल जाने से, अथवा, राग के चलन से दोनों बिल्कुल एक स्वर वाले राग भी बिल्कुल पृथक होते हैं। अत: गाते बजाते समय इन बातों का खयाल रखना बहुत ज़रूरी है जिस
राग भूपाली जैसा ही राग है- राग देसकार। दोनों में ही 'सा रे ग प ध' स्वरों का प्रयोग होता है, मगर दोंनों रागों का ठाठ अलग है, न्यास के स्वर अलग हैं और एक पूर्वांग तो दूसरा उत्तरांग प्रधान राग है।
भूपाली में ध्यान दें कि सा ध़ सा रे ग का प्रयोग बहुत होता है। ये इसका मुख्य स्वर समुह है, ग का बहुतायत से प्रयोग होता है।
http://www.sawf.org/audio/bhoop/fhk_bhoop.ram
http://www.sawf.org/audio/bhoop/bgak_bhoop.ram
http://www.sawf.org/newedit/edit08052002/musicarts.asp
मैं इन सभी वेब साइट को प्रकाशित करने वालों की भूरि भूरि प्रशंसा करती हूँ और धन्यवाद ज्ञापन भी ।