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Saturday, April 25, 2009

चैत में गाई जाने वाली चैती

चैत्र के महीने में गाई जाने वाली उप-शास्त्रीय संगीत में एक प्रकार की बंदिश है चैती। इसमें रामा शब्द का प्रयोग बार बार होता है और इसमें कोयल की कूक, विरह, प्रेम, साजन से प्रेम निवेदन, और कई बार राम जी का वर्णन होता है। क्योंकि चैत्र मास में होली आती है, कई बार चैती में होली का वर्णन भी होता है। मन को छूने वाली चैती की जन्मभूमि बनारस मानी जाती है। बिहार में भी चैती गाई जाती है।

आज शुभा मुद्गल की आवाज़ में सुनते हैं ये चैती-

सपना देखीला पलकनवा हो रामा, सैंया के आवनवा

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आभार- ईस्निप्स डाट काम

Saturday, March 28, 2009

नवरात्रि पर भवानी दयानी और राग भैरवी का परिचय

नवरात्रि के अवसर पर प्रस्तुत है राग भैरवी पर आधारित परवीन सुल्ताना द्वारा गाया विख्यात- भवानी दयानी...

आइये इस सुंदर भजन को सुनने से पहले राग भैरवी के बारे में जानें-

रे ग ध नि कोमल राखत, मानत मध्यम वादी।
प्रात: समय जाति संपूर्ण, सोहत सा संवादी॥

इस राग की उत्पत्ति ठाठ भैरवी से मानी गई है। इसमें रे, ग, ध, और नि, कोमल लगते हैं और म को वादी तथा सा को संवादी स्वर माना गया है। गायन समय प्रात:काल है।

मतभेद-
इस राग में कुछ संगीतज्ञ प सा किंतु अधिकांश म-सा वादी संवादी मानते हैं।

विशेषता-

१.ये एक अत्यंत मधुर राग है और इस कारण इसे सिर्फ़ प्रात: समय ही नहीं बल्कि हर समय गाते बजाते हैं। सभी समारोहों का समापन इसी राग से करने की प्रथा सी बन गयी है।

२.आजकल इस राग में बारहों स्वर प्रयोग किये जाने लगे हैं, भले ही इसके मूल रूप में शुद्ध रे, ग, ध, नि लगाना निषेध माना गया है।

३.इससे मिलता जुलता राग है- बिलासखानी तोड़ी।

आरोह- सा रे॒ ग॒ म प ध॒ नि॒ सां।
अवरोह- सां नि॒ ध॒ प म ग॒ रे॒ सा।
पकड़- म, ग॒ रे॒ ग॒, सा रे॒ सा, ध़॒ नि़॒ सा। (़ = मन्द्र स्वर)


भवानी दयानी
महा वाकवानी
सुर-नर-मुनि जनमानी
सकल बुधज्ञानी

जगजननी जगदानी
महिषासुर मर्दिनी
ज्वालामुखी चंडी
अमर पददानी

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(आभार: परवीन सुल्ताना का ये भजन मुझे ईस्निप्स.काम पर मिला।)

Saturday, March 07, 2009

दो बंगला होली गीत- अजय चक्रवर्ती और मानवेन्द्र/श्यामल मित्र

इस पोस्ट में होली के अवसर पर दो बंगला होली गीतों का आनंद लीजिये-

पहले पंडित अजय चक्रवर्ती की आवाज़ में-

होली खेलीछे श्याम कुंज कानने



फिर कई रागों का मिश्रण इस गीत में। बसंत राग की छाया में रचा गया ये गीत मानवेन्द्र मुखर्जी और श्यामल मित्र की आवाज़ में सुनिये-

सुंदर नटवर खेलत होरी-



सभी को २००९ में होली की शुभकामनायें।