Thursday, October 11, 2007

राग भूपाली -आगे (बंदिश सिखाने की कोशिश)

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(सबसे पहले एक त्रुटि के लिये क्षमा याचना कर लूँ| रिकार्डिंग करते वक्त राग देसकार की वादी को मैंने प बताया, और दोबारा सुनने पर गलती का अहसास हुआ। राग देसकार का वादी स्वर ध है। (कभी अगर पूरी रिकार्डिंग फिर करूँ तो इस गलती को सुधार लिया जायेगा।)

आज मैं पिछले लेख में लिखे भूपाली राग के बंदिश को गाने की कोशिश कर रही हूँ जिससे कि ये नये सीखने वालों के लिये आसान हो। कृपया पिछले लेखों को ध्यान से पढ़ें।

गायक को कुछ बातों पर ध्यान देना चहिये । जैसे कि कुछ रागों के स्वर एक ही होते हैं मगर भिन्न स्वर समुह के प्रयोग से या न्यास के स्वर बदल जाने से, अथवा, राग के चलन से दोनों बिल्कुल एक स्वर वाले राग भी बिल्कुल पृथक होते हैं। अत: गाते बजाते समय इन बातों का खयाल रखना बहुत ज़रूरी है जिस

राग भूपाली जैसा ही राग है- राग देसकार। दोनों में ही 'सा रे ग प ध' स्वरों का प्रयोग होता है, मगर दोंनों रागों का ठाठ अलग है, न्यास के स्वर अलग हैं और एक पूर्वांग तो दूसरा उत्तरांग प्रधान राग है।

भूपाली में ध्यान दें कि सा ध़ सा रे ग का प्रयोग बहुत होता है। ये इसका मुख्य स्वर समुह है, ग का बहुतायत से प्रयोग होता है।



http://www.sawf.org/audio/bhoop/fhk_bhoop.ram

http://www.sawf.org/audio/bhoop/bgak_bhoop.ram

http://www.sawf.org/newedit/edit08052002/musicarts.asp

मैं इन सभी वेब साइट को प्रकाशित करने वालों की भूरि भूरि प्रशंसा करती हूँ और धन्यवाद ज्ञापन भी ।

4 Comments:

Blogger Aditya said...

This post has been removed by a blog administrator.

3:54 AM  
Blogger parul k said...

bahut sundar aapka prayaas.....bahut kuch seekhney mila shukriya

5:59 PM  
Blogger Reetesh Gupta said...

बहुत सुंदर ...आपको सुनकर बहुत अच्छा लगा
आपका सेवा भाव और प्रयास अत्यंत ही सराहनीय है..

कृपया इस क्रम को जारी रखें ...दूसरी रागों के बारे में भी हमे बताये...हार्दिक धन्यवाद

5:13 AM  
Blogger hemanshow said...

बहुत खूब! जारी रखें।

5:33 AM  

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