Thursday, July 24, 2008
राग मुल्तानी:
इस पोस्ट में राग मुल्तानी पेश है।
*नीचे आप जहाँ भी ~ चिन्ह देखें, ये मीड़ दर्शाने के लिये है।
*और ( ) खटका दिखाने के लिये। अर्थात अगर (सा) दिखाया गया है तो इसे 'रे सा ऩि सा' गाया जायेगा।
राग परिचय:
थाठ: तोड़ी
वादी: प
संवादी: सा
जाति: औडव-संपूर्ण
आरोह में रे और ध वर्जित स्वर हैं
गायन समय: दिन का चौथा प्रहर
स्वर:- कोमल रे, कोमल ग, तीव्र म का प्रयोग, बाकी सब स्वर शुद्ध
आरोह: ऩि सा म॑~ग॒ म॑~प, नि सां ।
अवरोह: सां नि ध॒ प, म॑ ग॒ म॑ ग॒, रे॒ सा।
पकड़: ऩि सा म॑~ग॒ ऽ म॑ प, म॑ ग॒ म॑ ऽ ग॒ रे॒ सा।
कुछ विशेषतायें-
तोड़ी थाठ से होते हुये भी ये राग तोड़ी की प्रकृति का तो है मगर तोड़ी से बहुत भिन्न है।
इसे गाते बजाते वक्त कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
१) बहुधा इस राग में आलाप तान मन्द्र निषाद से प्रारम्भ करते हैं। ऩि सा ग॒~म॑ प...
२) कोमल ग का प्रयोग तीव्र म के साथ मीड़ में होता है और ये इस राग की खा़स बात है। इसी तरह, कोमल रे को गाते समय कोमल ग का कण लगता है। इस तरह से कोमल रे और कोमल ग अपने स्थान ने थोड़े चढ़े हुये होते हैं। तीव्र म भी प के करीब है।
३) इस राग में शुद्ध रे और शुद्द ध लगा देने से राग मधुवंती बन जाता है।
आइये पहले कुछ आलाप करें। अगले पोस्ट में गाना।
१) सा, ऩि सा ग॒ रे॒ सा, (सा) ऩि सा म॑ ग॒ ऽ म॑ प, म॑ ग॒ म॑ ग॒ रे॒ सा, ऩि सा ग॒ रे॒ सा।
२) म॑~ग॒ ऽ म॑ प, (प) म॑ ग॒ म॑ प, ऩि सा ग॒ म॑ प, सा प ऽ प, म॑ प ग॒ ऽ म॑ प ऽ ऽ प, (प) म॑ ग॒ म॑ ग॒ रे॒ सा।
३) ग॒ म॑ प ऩि ऽ नि सां, सां प नि सां गं॒ रें॒ सां, नि सां मं॑ गं॒ रें॒ सां, गं॒ रें॒ सां, नि सां नि ध॒ प, प~ ग॒ ऽ म॑ प नि ध॒ प, ध॒ प म॑ प ग॒ ऽ ऩि सा म॑~ ग॒ प~म॑ ध॒~प म॑ ग॒ रे॒ सा, ऩि सा ग॒ रे॒ सा।
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8 comments:
अति उत्तम प्रयास!
यदी आप राग की गायन में mp3 और उस पर आधारित कोई गीत भी प्रस्तुत करेंगे तो सुहागे पे सोना हो जाएगा!
अपने ब्लाग को ब्लॉगवाणी तथा चिट्ठाजगत में रजिस्टर आवश्य करवाएं.
मेरी समझ से संगीत पर केन्द्रित बहुत कम ब्लॉग हैं। आपकी महत्ता इसलिए भी बढ जाती है कि आप आम जन से शास्त्रीय संगीत का परिचय करा रहे हैं।
संगीत की तो ज्यादा समझ नहीं है मुझे मगर यह मानना ही पडेगा कि यह एक बहुत सराहनीय प्रयास है आपका. और हाँ, आपकी आवाज़ भी बहुत अच्छी है.
सराहनीय प्रयास.साथ मेम कुछ सुनने का प्रबंध भी हो पाता तो क्या कहने.
bahut khushi hai ki aapka blog mila hai... mujhe hindustani shastriy sangit bahut pasand aata hai aur main use sikhti hun...
तो अब तय हुआ यह कि हम कुछ सीखने के लिये यहां हाजिरी लगाते रहेंगे!
आपके ब्लॉग पर पहली बार आया . कितने परिश्रम से जारी किये हैं आपने ये सारे लेख.सोदाहरण व्याख्या से मुझ जैसे कानसेन का बड़ा भला होगा. बार बार आता रहूँगा आपको ब्लॉग.
आपने शास्त्रीय संगीत के लिये ये अप्रतिम काम अंजाम देकर बड़ा पुण्य कमा लिया है.
अशेष शुभेच्छाएँ.
Wah, Manoshi. Finally you have started posting again. I hope we will start seeing many more such very informative blogs from you.
Lok forward to lots more.
Thanks
Milind
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