Monday, May 30, 2011

ग़ज़ल- मेरी आवाज़ में- कुछ तो दुनिया के इनायात...

3 comments:

daanish said...

aawaaz, haalaanki
sun nahi paa rahaa hooN,,
ummeed hai
k is naayaab kalaam ko
bahut achhaa hi gaya hoga aapne .
mubarakbaad .

सतपाल ख़याल said...

bahut khoobsurat awaaz

daanish said...

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया ..

लफ्ज़ " तोड़ " पर ली गयी गमक लाजवाब लगी
शेरों के मिज़ाज के मुताबिक ही किया गया गायन
उस ग़ज़ल को अमर बना देता है
आप मुबारकबाद की हक़दार हैं !!

"daanish"